Diwali 2018: दिवाली पर भगवान गणेश की इस सामग्री से करें पूजा

By - Oct 31, 2018 06:05 AM
Diwali 2018: दिवाली पर भगवान गणेश की इस सामग्री से करें पूजा

कार्तिक मास की अमावस्या पर इस बार 7 नवंबर 2018 को दिवाली है। देश भर में दिवाली का पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। दिवाली पर विशेष तौर पर माता लक्ष्मी और गणेश भगवान की पूजा की जाती है। गणपति भगवान को विघ्नों का नाश करने वाले और ऋद्धि-सिद्धि के दाता हैं। इसलिए इन्हें सिद्धि विनायक भगवान भी कहा जाता है। दिवाली पर गणेश भगवान की पूजा की जाती है जिससे उनकी कृपा मिलती है। दिवाली पर श्रीगणेश पूजा बहुत कल्याणकारी है। कामनापूर्ति, स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि से लेकर अचानक संकट के लिए गणेष भगवान का ध्यान लाभकारी होता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश भगवान की पूजा आवश्यक बताई गई है। ऐसे ही माता लक्ष्मी के साथ गणेश भगवान की पूजा अनिवार्य है। इसलिए दिवाली 2018 पर हम आपको गणेश पूजा विधि बताने जा रहे हैं।
गणेश पूजा के लिए सामग्री 
गणेश भगवान के लिए आसन चौकी
चौकी के लिए लाल कपड़ा
जल कलश
पंचामृत
रोली,मोली लाल चंदन
गंगाजल
सिंदूर
पांच पकवान 
चांदी का वर्क
मोदक या लड्डू
हरे मूंग
गुड़
धानी
नारियल
फल
दूब घास
पंचमेवा
घी का दीपल
धूप, अगरबत्ती
कपूर
दिवाली पर गणेश पूजा विधि
पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें। गणेश भगवान, लक्ष्मी माता और सरस्वती की मूर्ती स्थापित करें।
 सर्वप्रथम लाल चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर गणेश तीनों मूर्तियों का शुद्धिकरण करें। श्रद्धा भक्ति के साथ घी का दीपक जलाएं। दीपक रोली, कुमकुम अक्षत और पुष्पों से पूजन करें। अगरबत्ती धूप जलाएं। जल भरा हुआ कलश स्थापित करें। कलश का पूजन करें। अब गणेश भगवान का ध्यान करें। भगवान श्रीगेश को तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। उन्हें, शुद्ध स्थान से चुनी हुई दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए। 
 श्रीगणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए। साथ ही मिछाइयां, गुड़ और फल का नैवेद्य चढ़ाएं। गणेश भगवान को जल, कच्चे दूध और पंचामृत से स्नान कराएं। गणेश भगवान को नवीन वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। व्रत व पूजा के समय किसी प्रकार का क्रोध व गुस्सा न करें। यह हानिप्रद हो सकता है। किसी भी पूजा के उपरांत सभी आवाहित देवताओं की शास्त्रीय विधि से पूजा-अर्चना करने के बाद उनका विसर्जन किया जाता है, किन्तु श्री लक्ष्मी और श्रीगणेश का विसर्जन नहीं किया जाता है। दिवाली पूजा में श्रीगणेश को लक्ष्मी जी के साथ निवास के लिए आमंत्रित किया जाता है।