बीजेपी मना रही राजमाता का जन्म शताब्दी वर्ष, नेताओं ने दी श्रद्धांजली

By - Oct 12, 2018 07:18 AM
बीजेपी मना रही राजमाता का जन्म शताब्दी वर्ष, नेताओं ने दी श्रद्धांजली

ग्वालियर: भाजपा आज राजमाता विजयाराजे सिंधिया की जन्मश्ताब्दी मना रही है। ग्वालियर में उनकी समाधि पर पहुंच कर भाजपा और कांग्रेस के तमाम नेताओं ने श्रद्धांजली देते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किये।
सीएम शिवराज ने दी श्रद्धांजली
मुख्यमंत्री शिवराज ने भी राजमाता को श्रद्धांजली देते हुए ट्विटर पर लिखा "राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और गरीब कल्याण के लिए समर्पण की प्रतिमान परम श्रद्धेय राजमाता विजयराजे सिंधिया को जयंती पर सादर नमन करता हूँ। आपके तप, त्याग और निष्ठा से पल्लवित संगठन विश्व के सबसे बड़े दल के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसके माध्यम से हम सतत सेवा कार्य कर रहे हैं"। राष्ट्रसेवा, महिला सशक्तिकरण और गरीब कल्याण के लिए समर्पण की प्रतिमान परम श्रद्धेय राजमाता विजयराजे सिंधिया को जयंती पर सादर नमन करता हूँ। आपके तप, त्याग और निष्ठा से पल्लवित संगठन विश्व के सबसे बड़े दल के रूप में प्रतिष्ठित है, जिसके माध्यम से हम सतत सेवा कार्य कर रहे हैं।
यशोधरा राजे सिंधिया ने दी श्रद्धांजली
समाधि पर पहुंच कर राजमाता की बेटी यशोधरा राजे सिंधिया ने श्रद्धांजली अर्पित की। ग्वालियर में उनके समाधि स्थल पर श्रद्धांजलि सभा और भजन कीर्तन के साथ सालभर चलने वाले आयोजन का सिलसिला शुरू किया गया। इस मौके पर राजमाता की बेटी तथा प्रदेश की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के अलावा नारायण सिंह कुशवाहा और माया सिंह ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। बीजेपी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओ ने भी समाधि स्थल पर ग्वालियर की राजमाता को याद किया। यशोधरा राजे ने कहा कि इस आयोजन को किसी भी चुनाव से जोड़कर ना देखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राजमाता ऊपर से सब देख रही हैं उनके इस बयान के कई मायने लगाए जा रहे हैं।
राजमाता की याद में यहां से मैराथन दौड़ शुरू हो रही है। इस रेस में देशभर के 150 धावक शामिल होंगे। लेकिन इनमें सबसे खास मान सिंह होंगी जिनकी उम्र 102 वर्ष होने के बाद भी वे इस मैराथन रेस में हिस्सा ले रही हैं। ये रेस राजस्थान और उत्तरप्रदेश राज्यों से होकर गुजरेगी।
कौन थी राजमाता..
बता दें कि राजमाता विजयाराजे सिंधिया ग्वालियर के आखिरी सत्ताधारी महाराजा जिवाजीराव सिंधिया की पत्नी थीं, वह राज्य के सर्वोच्च शाही हस्तियों में शामिल थीं, बाद में वे भारत से राजशाही समाप्त होने पर राजनीति में उतर आईं और कई बार भारतीय संसद के दोनों सदनों में चुनी गई। वह कई दशकों तक जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी की सक्रिय सदस्य भी रहीं।